क ख ग घ को पहचानो
मैं हिंदी हूं अपनी मानो
मान करो सम्मान करो
निज बोली पर अभिमान करो
अंग्रेजी के फंदे तोड़ो
मातृभाषा से नाता जोड़ो
हेलो हाय को बाय करो
हाथ जोड़ प्रणाम करो ।
🙏

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गीत
——-

कभी बंद कभी हड़तालें कैसी लूट मचाई रे
पिसता है हर बार गरीब मेरे मालिक राम दुहाई रे

कभी अन्न तो कभी सब्जियां
कचरे में फिकवाते हैं
दूध का दरिया खुलेआम
सड़कों पर बहाते हैं
बूंद बूंद को बच्चे तरसे इनको लाज ना आई रे

जब मन चाहा राह रोक दी
संपत्ति का नुकसान किया
जान माल की हानि इतनी
करके तुमको मिला है क्या
जोश जोश में खेल बिगाड़ा बात समझ भी न आई रे

मेहनत की रोटी का बंधु
ऐसे मत अपमान करो
कुनीति के जाल में फंसकर
ना अपनो को परेशान करो
जियो चैन से जीने भी दो छोटी उमरिया पाई रे …..

सपना सक्सेना
ग्रेटर नोएडा

अल्फाज
——–
बांट रहे हो जाति धर्म में मानव के सम्मान को ,
सत्ता सुख के लिए बिकाऊ कैसे तुम इंसान हो …..

कल तक जिसके गीत सुनाए
चरणों में सिर डाल दिया …
आज उसी के नाम का सिक्का
चौराहे पर उछाल दिया …
किसी एक के रहे कभी ना जग ज़ाहिर बेईमान हो
सत्ता सुख ………..

भूखी प्यासी बेबस जनता
कैसे कैसे बहकाते हो…
कभी आरक्षण कभी कीमतें
नित नई आग लगाते हो….
काठ की हांडी एक बार ही भूल गए ..नादान हो
सत्ता सुख …………

अपनी करनी याद नही
दूजे के दोष गिनाने में….
लगा दिया है बल सारा
तीन को पांच बनाने में …..
जिसकी खातिर चुने गए उसी से बस अंजान हो
सत्ता सुख…….

सपना सक्सेना
ग्रेटर नोएडा

धरती की बात दूर है तस्वीर हम ना देंगे
कश्मीर हमारा है कश्मीर हम ना देंगे

जुलमो सितम की इंतिहा अब होने लगी है
रंगत सुहाने स्वर्ग की भी खोने लगी है
दुश्मन की शातिराना चालों का असर है
सुर्ख, हिमालय की हिम होने लगी है
नफरत के बीज उगने नही देंगे चमन में
दिलों को जोड़ती सी जंजीर हम ना देंगे
कश्मीर हमारा है……. .

कहीं बम कहीं गोली कहीं पत्थर बरस रहे
अपने ही पहरेदारों के हाथों को कस रहे
नासमझ अपनो को पहचानते नहीं
ये नौजवान कैसे दलदल में धंस रहे
सरहद के पार से बस खंजर ही मिलेगा
वो वहशी कभी रौशन तकदीर नही देंगे
कश्मीर हमारा है ………

सपना सक्सेना
स्वरचित

चौपाई
—‘——

मातु देवकी जन्म दिलाई,
बचपन के सुख जसमति पाई ।
गोकुल में आखों के तारे,
गिरवर धारी नंद दुलारे ।।

बाल समय में माटी खाई ,
जसमति माई मारन आई ।
जब तूने मुख् खोल दिखाया,
उसमें था ब्रह्मांड समाया ।।

पूतना मारी कंस को मारा ,
जनम जनम के दुख से तारा ।
आन बसो हिय जानि धामा,
निसदिन जपते राधा नामा ।।

प्रणाम 🙏
आज की प्रस्तुति
ग़ज़ल
——-
2122 2122 2122 212

ग़ज़ल
——–
रात भर मेरा तडपना और जलवा चांद का
क्या कहें दिल का धडकना और जलवा चांद का

वो नही आये मगर कोई कसक होती रही
मुस्तकिल यादें बरसना और जलवा चांद का

तुम मेरे हो ये यकीं होने तलक रुकते जरा
तीर सा तेरा निकलना और जलवा चांद का

कट गई थोड़ी बहुत जो साथ तेरे जिन्दगी
याद कर कर के सिसकना और जलवा चांद का

आखिरी पैगाम पहुचे कातिलों के पास में
उम्र भर उनका तरसना और जलवा चांद का…

सपना सक्सेना
ग्रेटर नोएडा

जीवन -मृत्यु
————-
जीवन दो पल
मृत्यु अटल
हर पल जीना
निखर नवल
जो होना है
होके रहेगा
लेकिन जाता
पल न रुकेगा
जीवन के पल
खिलने दो
रंगो में रंग
मिलने दो
खुशियों के
रस पीने दो
हंस के जियो
और जीने दो …

सपना सक्सेना
स्वरचित

चल दिए छोड़ के
किससे कहूं जो रोके
ना जाओ सुनो तो ……
अब ना होगी वो मुस्कान मीठी
वो बातें हठीली कोमल तीखी
जो महकेगी याद कभी तो कहेंगे
अटल थे सदा अटल ही रहेंगे …….😢🙏🙏🙏

मेरा हिंदुस्तान
——————

झूम झूम के गाए तिरंगा गाथा देश महान की
ठाठ अलग हैं बात अलग है मेरे देश महान की

लाख लगाए कोई पहरा जीत नहीं रुकने वाली
भाई भाई के अमर प्रेम की रीति नहीं मिटने वाली
दुश्मन की तोपों पर भारी दहाड़ वीर बलवान की ….

जो भी इस धरती पर आया उसको ही सत्कार मिला
भेदभाव का नाम नहीं है सबको बराबर प्यार मिला
प्रेम भाव से मिलकर रहना छोड़ो बात नादान की

ठाठ अलग हैं बात अलग है मेरे हिंदुस्तान की ….

सरहद की पहरेदारी में मेरे वीर जियाले हैं
जिनकी लहू की बूंदों से घर-घर में उजाले हैं
श्रद्धा से सिर झुक जाते जब बात छिड़ी जवान की

ठाठ अलग हैं बात अलग है मेरे हिंदुस्तान की ….

स्वरचित
सपना सक्सेना

मेरा हिंदुस्तान
——————

झूम झूम के गाए तिरंगा गाथा देश महान की
ठाठ अलग हैं बात अलग है मेरे देश महान की

लाख लगाए कोई पहरा जीत नहीं रुकने वाली
भाई भाई के अमर प्रेम की रीति नहीं मिटने वाली
दुश्मन की तोपों पर भारी दहाड़ वीर बलवान की ….

जो भी इस धरती पर आया उसको ही सत्कार मिला
भेदभाव का नाम नहीं है सबको बराबर प्यार मिला
प्रेम भाव से मिलकर रहना छोड़ो बात नादान की

ठाठ अलग हैं बात अलग है मेरे हिंदुस्तान की ….

सरहद की पहरेदारी में मेरे वीर जियाले हैं
जिनकी लहू की बूंदों से घर-घर में उजाले हैं
श्रद्धा से सिर झुक जाते जब बात छिड़ी जवान की

ठाठ अलग हैं बात अलग है मेरे हिंदुस्तान की ….

स्वरचित
सपना सक्सेना