हवा का चित्र

सोचा है सबको दिखलाऊ
एक हवा का चित्र बनाऊं
सुन्दर घेरेदार घाघरा
सागर जैसी लहरों वाला

कोमल कोमल पत्तों जैसा
चूनर का रंग हरा हरा सा
बादल जैसे काले केश
हिम का शीतल हार विशेष
फूलों जैसा सुंदर मुखड़ा
आपदमस्तक चांद का टुकड़ा
किंतु प्रश्न खड़ा है मौन
भाई हवा को देखे कौन ?

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प्यारी धरती
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जैसे कोई गोल नारंगी
धरती प्यारी रंग बिरंगी
गहरे नदिया झील समंदर
ऊंचे झरने चढते अंबर
हिम शिखरों पर तिरते बादल
रवि किरणों को हरते जंगल
रूपहली चादर से मरूस्थल
कहीं घनघोर बरसते जलदल
कितना देती कितना सहती
मेरी प्यारी प्यारी धरती ।
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एक के बाद एक वही ह्रदय विदारक घटनाएं । मासूमियत के दुश्मन नरपिशाच जंगली घास की तरह फैलते ही जा रहे हैं ।कैसी परवरिश मिली है इनको ? कहां से कुविचार पैदा होते हैं ?
संवेदनाओं से परे निकृष्ट मानसिकता !
घोर निंदनीय अस्तित्व !
घर ,परिवार, समाज, कानून , आत्मा, परमात्मा किसी का भय नही । कुकृत्य पर कोई ग्लानि कोई पश्चाताप नही ।
और जो उनके सहायक है उनका तो जीवन ही व्यर्थ है ।

सुबह हुई
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सुबह हुई सूरज चढ़ आया
हवा ने मीठा गीत सुनाया
झूम उठी फूलों की डाली
उपवन की है छटा निराली
चिटर पिटर पंछी कुछ बोले
चलो उड़े पंखों को खोलें
दूर गगन में उड़ते जायें
आलस को अब दूर भगाए
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भाइयों और बहनों 🙏
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हमको भी नेता बनवा दो !
यहां वहां जैसे तैसे दो चार फोटो लगवा दो

दल बदली में माहिर हैं जो चाहे वो कर लेंगे
घटा जोड़ गुणा भाग से दो का दस कर लेंगे
ऐडी चोटी जोर लगा दें, कैसे भी कुर्सी चढवा दो
हमको भी नेता बनवा दो

हड़तालो और अनशन के आते सारे हथकंडे है
अंदर शैतानी ज्वाला है दिखते वैसे ठंडे हैं
बांट काट हैं खेल खिलौने, सत्ता का हलवा खिलवा दो
हमको भी नेता बनवा दो

रंगो के तो जादूगर हैं, काम ऐसा कर जायेंगे
हरा केसरी नीला जैसे कहो वैसे रंग जायेंगे
जनता को नही जगने देंगे, चाहे जो कसम खिलवा दो
हमको भी नेता बनवा दो

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हर कमी का नया विकल्प बना लेते हैं
जिंदादिल हर हाल जिंदगी को निभा लेते हैं ।
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कायदा याद रखना
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बुजुर्गो से मुखातिब हो तो कायदा याद रखना
कडवे नीम का हमेशा फायदा याद रखना

वक्त भर तो देता है हर जख्म को लेकिन
नासूर कर देता है उसे ज्यादा याद रखना

ठोकरों को भूल जाना, उठ कर चल देना
सबक सिखा दे जो वो हादसा याद रखना

यूं तो ढूंढेगे तुम्हें हर शय की सूरत में
थोड़ा मुश्किल होगा तेरा जायका याद रखना

वो दिन और थे कि जब बात पर जान दे दी
घड़ी भर का जुनून है कोई वायदा याद रखना ।

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अल्फाज
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दिल में याद जरूरी रख,
रिश्तों में थोड़ी दूरी रख

हां में हां जरूरी नही
कोई तो मजबूरी रख

जिंदा है तो कोशिश कर
ख्वाहिश रख, चाहे अधूरी रख

हमेशा हाजिर मत रह
कभी तो मजबूरी रख

अंधेरे घर हैं चिराग का
नूर आएगा कोशिश पूरी रख

सूरज की तपिश झुलसाएगी तो
एक शाम तो सिंदूरी रख

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आओ चलो हड़ताल करें
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बैठे बैठे कुछ न बूझे चल कर नया धमाल करें
आओ चलो हड़ताल करें

चलते सारे पहिए थम गये, सारी मेहनत पानी में
सडकों पर है दूध का अमृत, भूखे पेट किसानी में
मेरा मेरा जाप चले बस ,जनमानस बेहाल करें
आओ चलो हड़ताल करें

हम विधाता रोगी जन के, तृष्णा वश लाचार हैं हम
ऐश्वर्य में विघ्न पडे ना , चेतनाओ के पार हैं हम
जीवन मृत्यु हाथ में उसके, निज तो मालामाल करें
आओ चलो हड़ताल करें –”

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बात बड़ी है कुर्सी की
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जिसको देखो नचा रही है, बात बड़ी है कुर्सी की
आंख कान सब बंद पड़े, औकात बड़ी है कुर्सी की

एक तुम सारे भूखे नंगे रोटी दाल में लुट गये
जरा वजीर ने किया इशारा खड़े खड़े ही पिट गये
चुप रहो बस मुंह मत खोलो, जात बड़ी है कुर्सी की
बात बडी है कुर्सी की

इसे बिठाया उसे गिराया हरदम रेलमपेल नयी
जोड तोड़ के ठोक ठाक के चला रहे है रेल नयी
हाथ जोड़कर कांप रहे, सौगात बड़ी है कुर्सी की
बात बडी है कुर्सी की

पागल होकर नोंच रहे एक दूजे को चौराहे पर
इसको मारा उसको फूंका लाचार लाज चौराहे पर
अभी वक्त है बचकर रहना, घात बड़ी है कुर्सी की
बात बड़ी है कुर्सी की

🙏