नये रंग

रंग बदलते रिश्तों के ,ढब अंदाज़ निराले हैं

मुस्कानों के पौधों पर, फूल आंसुअों वाले हैं |

मस्त बावरी दौड़ रही, आधुनिकता चँहु अोर

परंपरा घायल पड़ी, सोचे कित मेरा ठौर |

निर्लज्जता के नित खेल नये,बल- विवेक सब मौन

बुद्धि मद के वश पड़ी, किसे पुकारे कौन |

रोज़ नये पाखंड हैं, रोज़ नये अवतार

श्रद्धा दर-दर डोलती , मन के खोलो द्वार |

संबंधो में मान हो,भरो प्रेम मधुरंग

यही है सच्चा मंत्र अौर, यही सच्चा सतसंग |

          **************

हर सुबह बदलता है, हर शाम बदलता है,

मौसम की तरहह्मर पल, इंसान बदलता है |

क्या करिये यकीं उसका, जो खुद को नहीं हासिल

आईना भी है शर्मिंदा, ईमान बदलता है

कहता है जिसे अपनी जागीर,नहीं उसकी

ये वक्त सदा होके मेहरबान बदलता है

उलझा है इस तरह अपने ही सायों में

कभी राहें कभी मंज़िल.नादान बदलता है

जो साथ नही कोई ,ग़म न करो इसका

गिर -गिर उठना ही,पहचान बदलता है |

 *******************

   ***************

साये नाकामियों के ढलते नही

क्यों दहलीजं के मौसम बदलते नहीं,

थमा न देना भरोसा बिगड़े मिज़ाज हाथों में

आंधियों की निगहबानी में चिराग़ जलते नही,

मजबूत पकड़ रखना ज़मीर के किरदार पर

नज़रों से गिरने वाले फिर संभलते नहीं,

सहारा दे कोशिशों को कहीं हार न जाये

मेहनतों के नतीज़े ज़ल्दी निकलते नहीं,

बिगड़ने ना दो बात को बढ़कर संभाल लो

गुरूर के घरों में रिश्ते पलते नहीं !!

  ***************

    ************

यादें

कल रात चांदनी ने कुछ गाया तो होगा

दिल के आंगन में ग़म छाया तो होगा

माना कि तेरे दिल में कहीं घर नहीं मेरा

पर, यादों में भटकता सा एक साया तो होगा

हम न रहे होंगे कुछ कमी तो लगी होगी

कुछ तेरे दिल ने तुझको समझाया तो होगा

लोगों की बातों का मत मान बुरा लेना

 ज़ाहिर है आईना दिखलाया तो होगा.|

जागो

आपस की तकरारें छोड़ो मिलकर सारे साथ चलो

रंजिश की तलवारें फेंको हाथ में लेकर हाथ चलो

बेमतलब की बात करो ना;माँ की तुम  पुकार सुनो

भेदभाव के रस्ते छोड़ो नेक वतन की राह चुनो

वक्त है अब मज़बूत करो तुम सीमा पर दीवारो को

पलने मत दो घर के अंदर जयचंद गद्दारो को

सीमा पर लड़ने वाले वीरों के हथियार बनो

उठो संभालो घर अपना लाज के पेहरेदार बनो  !!!