सूरज ठंडे ही जाओ
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बात हुई क्या सूरज दादा
सुबह से ही रूठे हो
चेहरा है या चमक नारंगी
मुंह फुलाए बैठे हो
सता रहे क्यों सबको बाबा
कितनी गर्मी कर दी है
छांव भी लगती आग जैसी
हालत पतली कर दी है
सूख रहे हैं ताल तलैये
पौधे सारे मुरझाए
बच्चे हो गये बंद घरों में
नही खेलना मन भाए
छोड भी दो ये गुस्सा अब तो
तुम भी आखिर अपने हो
वर्फ मलाई लस्सी ले लो
जल्दी ठंडे हो जाओ ।

चित्र लेखन

तेरी जो तस्वीर बना दे
वो रंग कहां से लाऊं
हे जननी! शत बार नमन
पग रज शीश लगाऊं
नही कलम में शक्ति इतनी
तेरी ममता पर बोल लिखे
धरती से भी सहनशील
जीवन का सिर पर बोझ धरे
तपते जलते इस पथ पर
अगाध प्रेम की सूरत है
दृढ चेहरा आंचल में अमृत
देवी स्वरूपा मूर्त है
साया भी तेरा पड़ जाये
तो जन्म सफल मैं पाऊं
हे जननी ! शत बार नमन
पग रज शीश लगाऊं।

सपना सक्सेना
स्वरचित

अल्फाज
🌼🌼🌼

गुर्बत के आलम में अंदाज शहाना है
ऐसा भी बस्ती में कोई दीवाना है
क्या बिसात मुफलिसी की रंजो गम क्या करिये
दर्दे दिल से जिसका अरे इश्क पुराना है
जज्बात की तस्वीरें न चेहरे पे नुमाया हो
हर शय से नजाकत को हर हाल बचाना है
बहते हुए दरिया को तूफान क्या रोकेगा
ये एक हकीकत है वो एक फसाना है
चैन गजब का है इस मस्त फकीरी में
बाहों में आसमां है कदमों में जमाना है
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सपना सक्सेना
ग्रेटर नोएडा

शीर्षक – किसान

श्रम बूंदों से स्वागत करता
सूरज की पहली किरणों का
मद्धम मद्धम पदचापो से
पग पग अंतर नाप रहा
स्वेद नीर से सींच रहा
बंजर प्रस्तर धरती को
आंखों आँखों में तौल रहा
लहराते स्वर्णिम सपनों को
चटक रही है सूखी धरती
कैसे प्यास बुझाए
रूठ गया हो दाता जैसे
बिन बरसे घन जाए
बीज रहा है स्वप्न धरा में
तू मालिक रखना ध्यान
बुझ न जाए दीप आस का
हार न जाए किसान ।

सपना सक्सेना
ग्रेटर नोएडा

मंजिल
———

कर लिया जब पक्का इरादा
समझो मंजिल दूर नही
हार मान कर ठहर न जाना
ऐसे भी मजबूर नही
चाहे बिजली सिर पर टूटे
या तूफानो का शोर रहे
कांटे बिखरे राहों में पर
बस चलने पर जोर रहे
राह बना लो पर्वत से तुम
समझ के छोटा पत्थर है
चीर के दरिया पार हो, तुमसे
काम कौन सा बढकर है
दीया जला कर रखना हिम्मत वाला
मन के आँगन में
सपनो के रंग बरसेगे
आशाओं के सावन में
जो चलता ही रहता है
मेहनत जिसकी साथी है
एक न एक दिन पास में उसके
मंजिल खुद आ जाती है ।

महफिल में जाम आ गया
अब होगा कुछ न कुछ
औ बेलगाम आ गया
अब होगा कुछ न कुछ

अब तक संभाले बैठे थे
होश हवास हम
लो उनका नाम आ गया
अब होगा कुछ न कुछ

खुद से छिपाये रखा था
जिस गम को नाज से
वो सरे आम आ गया
अब होगा कुछ ना कुछ

दीवानगी के जोश में
जो मुस्कुरा दिए
गम तमाम आ गया
अब होगा कुछ न कुछ।

मिलन
🌿🌿

सांझ की झरती तालों पर
लयबद्ध पंछियों की कतारों से
फूटते मिलन को आतुर सुर
आह्लादित कर देते हैं अंतर्मन
जैसे थका हारा पथिक
लौट रहा हो अपनत्व के द्वार
स्पंदन की छितराई ताल पर
साधता हुआ पदचाप की लय
पुनः सजाने को जीवन के सुर ।

सपना सक्सेना
ग्रेटर नोएडा

चेहरा
🎭🎭🎭

किस्सा, हाल, किताबी चेहरा
दिल में ठाठ नवाबी चेहरा

कभी-कभी तो दुश्मन दिल का
करता बड़ी खराबी चेहरा

कितने ही रंगो का डेरा
पीला लाल गुलाबी चेहरा

अगर नजर हो पढ़ने वाली
तो अलमस्त हिसाबी चेहरा

बंद लवो की जुबान जानो
लगता साफ जवाबी चेहरा ।

फागुन
———

थोड़ा थोड़ा दोनो करीब आएं
चलो आज फागुनी हो जाएं

तुम हया का गुलाल बिखराओ
सपने आसमानी हो जाएं
चलो आज फागुनी ——

भुला कर दो पल के लिए दुनियादारी
बेधड़क बेमानी हो जाएं
चलो आज फागुनी ——

क्या रखा है उसूलों की चट्टानों में
कभी तो पानी पानी हो जाएं
चलो आज फागुनी ——–

चलो आज फागुनी —–

ख्वाहिश
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जब्त दरिया हूं मेरी लहरों को रवानी दे दो
लाके सागर से कोई मेरी जवानी दे दो

सारा हक लूट के ले जाए ये तो ठीक नही
रात की नज्म को मेरे गम की कहानी दे दो

क्यों परेशान हो चले जाते हैं महफिल से अभी
नब्ज थम जाए ये बस ऐसी निशानी दे दो

लाके छोडा है तेरी उलफत ने कहां देख मुझे
ठहरी आँखों में थोड़ा सा तो पानी दे दो