अल्फाज
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बेफिक्र परिंदा हूं आसमानों का
मत बांधो, शौक है उड़ानों का

हवाओं का रुख पहचानता हूं
पता है, मोल आशियानों का

सफर पर निकलने से पहले
पास रखना पता ठिकानों का

बहुत मीठे लोगों से भी बचना
क्या रंग निकले मेहरबानों का ?

अंधेरा हमेशा मुजरिम नही
कहीं उजाला साथी बेईमानों का ।

सपना सक्सेना
स्वरचित

मिलन
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सांझ मिलन की बेला में
दिन रात गले जब लगते हैं ,
रवि विदाई लेता है
तारागण उगने लगते हैं…

देहरी देहरी आँगन आँगन
दीप प्रज्वलित होते हैं ,
अंधकार की चूनर को
कोटि किरण से धोते हैं ….

घंटे अजान और शंखनाद
श्रवण पथ पावन करते हैं ,
परम शक्ति के स्मरण क्षण
अंतस आकुलता होते हैं ….

फिरने लगते हैं पंछी दल
दिनभर के श्रमफल साथ लिए ,
पथ पर लोचन बिछ जाते हैं
अपनों के मिलन की आस लिए ।।

सपना सक्सेना
स्वरचित

गीत
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रात अकेली बिरहन तरसे,
ऐसे मैं जो तुम आ जाते
कितने सावन मेघ न बरसे ,
दिल का अपने हाल सुनाते ।

किसको सुनाऊं सारी वो बातें ,
बनके धुआं जो दिल में सुलगे
आग लगाएं चांदनी रातें ,
डाल दिया ये किस मुश्किल में
लाख मनाऊं एक न माने
,दिल में कितने गम सौगातें ।

तेरी चाहत ने है बनाया
मुझको मूरत एक पत्थर की,
खुद ही खुद के दुश्मन हैं हम
छोटी सी ये बात न समझी ,
जान जो जाते तेरे इरादे
कदम कभी ना आगे बढाते ।।

सपना सक्सेना
स्वरचित

#भाव

#दुख की जो परछाई छू दे
आंसू बन ..पिघल …जाते हैं
अतिरेक हो #आनंद का तो..
मुसकानों में ..खिल..जाते हैं ,

#भाव अगर हों #भय वाले
स्वेद से ..झरने ..लगते हैं
#रौद्ररूप से परिपूर्ण हो
लोचन ..दहकने ..लगते हैं,

जो लहरायें #दयाभाव
पतित का ..आलिंगन ..लें
#वितृष्णा से भरें अगर
नृप को भी ..धूमिल ..कर दें,

#वात्सल्य और #करूणा की
देवी …माँ ..सबसे प्यारी है
#वीर हृदय देशभक्त के आगे
नतमस्तक ..सृष्टि ..सारी है।

सपना सक्सेना
स्वरचित

जरा संभल के
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जमा जमा के कदम बढ़ाना
कुछ राहें रपटीली सी
साथ समय के संभल के चलना
होगी चाल नशीली सी
चमक धमक में खो न जाना
ध्यान रखना मंजिल का
पलक झपकते बहकाती है
उम्र की नार रंगीली सी
कुछ मोड़ों पर फिसलन होगी
मन मदमाते नजारों की
राह सच की कांटो वाली
झूठ की मस्त रसीली सी
चुनने होंगे भविष्य के मोती
गहरे जाकर दरिया में
साहिल पर नही मिलने वाली
किस्मत वो सपनीली सी ।

सपना सक्सेना
स्वरचित

फरिश्ते
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भारत माँ के लाल फरिश्ते
कुदरत का कमाल फरिश्ते
दुश्मन ने जो आंख उठाई
कर देते बेहाल फरिश्ते
आन बान ईमान फरिश्ते
देश का दिल और जान फरिश्ते
हरदम खेले बाजी सिर की
मिट्टी पर कुर्बान फरिश्ते
शेरों की ललकार फरिश्ते
बिजली की तलवार फरिश्ते
देख के धड़कन रुक जाती
सीमा पर हाहाकार फरिश्ते

स्वरचित
सपना सक्सेना

-अवकाश –

सूरज चाचा बात सुनो तो
बहुत कर लिया तुमने काम
थक गए होंगे पिघल पिघल कर
जाकर थोड़ा करो आराम
दो चार दिन छुट्टी लेकर
हिमालय में घूम के आओ
गर्म लू जो तुम्हारी बिटिया
साथ उसे भी ले जाओ
तुम बिन कैसे भी रह लेंगे
रोज करेंगे तुमको याद
थोड़े को ही बहुत समझना
बस बाकी छुट्टी के बाद ।

सपना सक्सेना
स्वरचित

बाल गीत
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अब सो जाओ
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चांद खिला तारे मुसकाये
आई रात सुहानी
सुंदर सुंदर ढेरों सपने
लाई निंदिया रानी
ठंडी ठंडी हवा का झोंका
पलकों को सहलाये
फूलों जैसा नरम बिछौना
अपने पास बुलाये
टन टन टन टन घड़ी कहे
बड़ी देर हुई चुप हो जा
मां सुनाए मीठी लोरी
लाल मेरे अब सो जा ।

भावों के मोती
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हंस लेखनी चुन चुन लाई
शब्द मन की गहराई से
कुछ कुछ कच्चे कुछ कुछ पक्के
अमिया दूध मलाई से
कुछ तीखे नमकीन करारे
सीधे मन के पार हुए
तो कुछ कड़वे नीम सरीखे
जीवन का आधार हुए
बना बना कर माला रखती
अक्षर अक्षर इन्हे पिरोती
हरदम रहते पास हृदय के
प्यारे भावों के मोती ।

कोयल रानी
🌿🌿🌿🌿

जरा बता दो कोयल रानी
हमको क्या क्या खाती हो
सबके मन को हर लेता है
कितना मीठा गाती हो
बस केवल आवाज ही आती
नही दिखाई देती हो
थक जाते हैंं ढूढ ढूंढ कर
हरदम छिप कर रहती हो
जो बोलोगी वही करेंगे
हमे भी मित्र बना लो ना
हमको भी सब प्यार करेंगे
मीठा गान सिखा दो ना ।