जाने क्यूं ?
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खिलाफत के डर से टोकता बहुत है ,
ज़माना कदमों को रोकता बहुत है ….

देने को जवाब है मेरे पास मगर ,
कमबख्त ये दिल सोचता बहुत है …..

परदा करते हो आईने से ,कर लो !
तन्हाई में गुनाह कचोटता बहुत है ….

दान जप योग किसी काम के नही ,
ठुकराया हुआ भूखा कोसता बहुत है …..

तूफान में तो खिल लेता गुल मगर
डाली का झिटकना तोड़ता बहुत है ।।

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